अर्क कुम्भ विवाह पूजा उज्जैन

अर्क विवाह क्या होता है?

अर्क विवाह एक विशेष प्रकार का विवाह अनुष्ठान है, यह किसी भी पुरुष की कुंडली मे स्थित मंगल दोष को कम करने के लिए किया जाता है। मुख्यतः अर्क विवाह उन लोगों के लिए किया जाता है जिनकी कुंडली में मंगल ग्रह एक अशुभ स्थिति में होता है, जिसके कारण जातक को विवाह में देरी, बाधाएं और वैवाहिक जीवन में परेशानियां का सामना करना पड़ता हैं।

अर्क विवाह मे पुरुष के विवाह से पहले उसका विवाह पूरे विधि विधान के साथ अर्क वृक्ष के साथ किया जाता है, अर्क वृक्ष को सूर्य पुत्री भी कहा जाता है। सूर्य पुत्री अर्क के साथ विवाह की इस पद्धति को अर्क विवाह पूजा के नाम से जाना जाता है।

अर्क कुम्भ विवाह पूजा उज्जैन

अर्क विवाह किन पुरुषो का होना चाहिए

जिस किसी भी पुरुष मे नीचे दिए गए लक्षण परिलक्षित हो उन्हे जल्द से जल्द अर्क विवाह कराना चाहिए

  • जिन पुरुषो की कुंडली में सप्तम अथवा बारहवां भाव क्रूर ग्रहों से पीडि़त हो अथवा शुक्र, सूर्य, सप्तमेष अथवा द्वादशेष, शनि से आक्रांत हों ऐसे पुरुषो का अर्क विवाह होना चाहिए।
  • जब एक विधुर ने 3 शादियां की हों और तीनों पत्नियों की मृत्यु हो गई हो या किसी कारण से उसका तीनों पत्नियों के साथ तलाक हो गया हो, और संबंधित व्यक्ति पुनर्विवाह करने को तैयार हो, तो ऐसे व्यक्ति का अर्कविवाह किया जाता है।
  • जिस किसी भी पुरुष की कुंडली मे मंगल प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव मे से किसी एक भाव मे हो, तो उस पुरुष की कुंडली मे से मंगल दोष को दूर करने के लिए अर्क विवाह करना चाहिए।

अर्क विवाह पूजा के लाभ

अर्क विवाह पूजा के लाभ निम्नलिखित है
 
  • अर्क विवाह मंगल दोष को दूर करने में मदद करता है।
  • अर्क विवाह पूजा किसी भी पुरुष के विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करता है।
  • वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि लाता है।
  • पति-पत्नी के बीच प्रेम और स्नेह को बढ़ाता है।

कुम्भ या घट विवाह क्या होता है?

घट विवाह को कुम्भ विवाह भी कहा जाता है, यह एक विशेष विवाह अनुष्ठान होता है, जिसमे उन कन्याओ का विवाह जो मांगलिक या मंगल दोष से पीड़ित होती है, एक मिट्टी के बर्तन (घट) से किया जाता है। इस घट मे विष्णु भगवान की मूर्ति स्थापित होती है और उस मूर्ति के साथ कन्या का विवाह पूरे विधि विधान से किया जाता है। विवाह सम्पन्न होने के बाद मूर्ति को पानी मे बहा दिया जाता है। विवाह की इस पद्धति को कुम्भ विवाह के नाम से जाना जाता है।

कुम्भ या घट विवाह किन कन्याओ का किया जाता है?

कुंभ विवाह उन कन्याओ के लिए किया जाता है जिनकी कुंडली मे मंगल प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, और द्वादश भाव मे से किसी एक भाव मे स्थित हो, मंगल के इन भावो मे स्थित होने से कुंडली मे मांगलिक दोष परिलक्षित होता है, जिसे मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव से जोड़ा जाता है। मांगलिक दोष विवाह में देरी, वैवाहिक जीवन में परेशानी और यहां तक कि जीवनसाथी के लिए खतरा भी पैदा कर सकता है।

कुम्भ विवाह के लाभ

कुम्भ विवाह के लाभ निम्नलिखित है,

  • कुम्भ विवाह पूजा सम्पन्न करने से कुंडली मे से मंगल दोष को दूर किया जाता सकता हाइ।
  • कुम्भ विवाह किसी भी कन्या की कुंडली मे से दो विवाह के योग को दूर करता है।
  • कुम्भ विवाह कन्या के विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करता है।

 

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