अर्क विवाह उन पुरुषों के लिए किया जाता है जिनकी कुंडली में मंगल दोष है — विवाह से पहले अर्क (आक) वृक्ष से विधिवत विवाह कराया जाता है। कुंभ विवाह मांगलिक कन्याओं के लिए होता है, जिसमें विष्णु मूर्ति स्थापित घट से विवाह कराया जाता है। दोनों अनुष्ठान उज्जैन में आचार्य दीपक व्यास जी द्वारा शुद्ध वैदिक विधि से संपन्न कराए जाते हैं।
अर्क कुम्भ विवाह पूजा उज्जैन
अर्क विवाह उन पुरुषों के लिए किया जाता है जिनकी कुंडली में मंगल दोष है — विवाह से पहले अर्क (आक) वृक्ष से विधिवत विवाह कराया जाता है। कुंभ विवाह मांगलिक कन्याओं के लिए होता है, जिसमें विष्णु मूर्ति स्थापित घट से विवाह कराया जाता है। दोनों अनुष्ठान उज्जैन में आचार्य दीपक व्यास जी द्वारा शुद्ध वैदिक विधि से संपन्न कराए जाते हैं।
अर्क विवाह क्या होता है?
अर्क विवाह एक पारंपरिक अनुष्ठान है, जो मंगल दोष की शांति के लिए पुरुषों की कुंडली के अनुसार कराया जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में मंगल की स्थिति को लेकर चर्चा होती है, उनके लिए विवाह से पहले यह पूजा कराई जाती है। विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन की चिंता के समय परिवार इसे श्रद्धा से कराते हैं। विस्तार से जानने के लिए अर्क विवाह पूजा उज्जैन की पूरी जानकारी पढ़ें।
अर्क विवाह मे पुरुष के विवाह से पहले उसका विवाह पूरे विधि विधान के साथ अर्क वृक्ष के साथ किया जाता है, अर्क वृक्ष को सूर्य पुत्री भी कहा जाता है। सूर्य पुत्री अर्क के साथ विवाह की इस पद्धति को अर्क विवाह पूजा के नाम से जाना जाता है।
अर्क विवाह किन पुरुषो का होना चाहिए
परंपरा के अनुसार अर्क विवाह इन स्थितियों में कराने की सलाह दी जाती है:
- जिन पुरुषों की कुंडली में सप्तम या द्वादश भाव पर क्रूर ग्रहों का प्रभाव माना जाए, या शुक्र, सूर्य, सप्तमेश, द्वादशेश और शनि की स्थिति पर चर्चा हो।
- जिनकी कुंडली में मंगल प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में हो।
- पुनर्विवाह के समय पंडित जी कुंडली देखकर इस पूजा की सलाह दे सकते हैं।
हर कुंडली अलग होती है, इसलिए निर्णय से पहले कुंडली दिखाकर सलाह लें।
अर्क विवाह पूजा के लाभ
धार्मिक मान्यता के अनुसार अर्क विवाह पूजा के ये लाभ बताए जाते हैं:
- मंगल दोष की शांति के लिए श्रद्धापूर्वक किया जाने वाला अनुष्ठान।
- विवाह से पहले मन में संतोष और परिवार को आध्यात्मिक संबल।
- वैवाहिक जीवन में सुख और आपसी प्रेम की कामना।
कुम्भ या घट विवाह क्या होता है?
घट विवाह को कुम्भ विवाह भी कहा जाता है। यह मांगलिक कन्याओं के लिए किया जाने वाला पारंपरिक अनुष्ठान है। इसमें मिट्टी के घट में भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करके कन्या का विवाह विधि-विधान से कराया जाता है। विवाह संपन्न होने के बाद मूर्ति का जल में विसर्जन किया जाता है। इस पद्धति को कुम्भ विवाह कहा जाता है। विस्तार से जानने के लिए कुम्भ विवाह पूजा उज्जैन की जानकारी देखें।
कुम्भ या घट विवाह किन कन्याओ का किया जाता है?
परंपरा के अनुसार कुम्भ विवाह उन कन्याओं के लिए कराया जाता है जिनकी कुंडली में मंगल प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में हो। इसे मांगलिक स्थिति कहा जाता है। परिवार विवाह से पहले मन की शांति के लिए यह पूजा कराते हैं। कुंडली दिखाकर पंडित जी से सलाह लेना अच्छा रहता है।
कुम्भ विवाह के लाभ
धार्मिक मान्यता के अनुसार कुम्भ विवाह के ये लाभ बताए जाते हैं:
- मंगल दोष की शांति के लिए श्रद्धापूर्वक किया जाने वाला अनुष्ठान।
- विवाह की तैयारी में परिवार को आध्यात्मिक संबल।
- कन्या के सुखद वैवाहिक जीवन की कामना।
आचार्य दीपक व्यास जी के साथ उज्जैन में अर्क कुम्भ विवाह पूजा कराने के लिए श्रद्धालु वर्ष भर आते हैं। अगर आप भी अर्क विवाह या कुम्भ विवाह पूजा के बारे में जानना चाहते हैं, तो पंडित जी से निःशुल्क परामर्श लें। जो परिवार उज्जैन नहीं आ सकते, उनके लिए लाइव वीडियो से ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था है।
अर्क विवाह उन पुरुषों के लिए किया जाता है जिनकी कुंडली में मंगल दोष है — विवाह से पहले अर्क (आक) वृक्ष से विधिवत विवाह कराया जाता है। कुंभ विवाह मांगलिक कन्याओं के लिए होता है, जिसमें विष्णु मूर्ति स्थापित घट से विवाह कराया जाता है। दोनों अनुष्ठान उज्जैन में आचार्य दीपक व्यास जी द्वारा शुद्ध वैदिक विधि से संपन्न कराए जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अर्क विवाह किसे कराना चाहिए?
जिस पुरुष की कुंडली में मंगल 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो।
कुंभ विवाह किसे कराना चाहिए?
मांगलिक दोष वाली कन्या को विवाह से पहले।
पूजा की अवधि और सामग्री क्या होगी?
अवधि और सामग्री विधि अनुसार तय होती है; सटीक जानकारी बुकिंग के समय पंडित जी से निःशुल्क परामर्श में लें।
क्या सामग्री हमें लानी होगी?
नहीं, पूजा की व्यवस्था के बारे में पंडित जी बुकिंग पर बता देते हैं।
बुकिंग कैसे करें?
पंडित जी से संपर्क करें; मुहूर्त कुंडली अनुसार निकाला जाता है।